Age Power

This “Age Power” section has been started to share your, our reader’s, views on “Harnessing Energy of Senior Citizens In Nation Building”. You may also find your write-up here. Write a piece in 500 to 700 words and send to us.

जीवनसाथी के बिना जीने की तैयारी

जीवनसाथी के बिना जीने की तैयारी Preparing to Live Without Your Spouse

एक ऐसा विषय है, जिसका सामना हर बुजुर्ग दंपती को कभी न कभी करना है, लेकिन इस पर बात करने का साहस बहुत कम लोग जुटा पाते हैं—जब जीवनसाथी नहीं रहेगा, तब मैं कैसे जीऊंगा? आज के समाज में बुजुर्ग अलग-अलग परिस्थितियों में रह रहे हैं। कुछ दंपती साथ रहते हैं, जबकि उनके बच्चे दूसरे […]

जीवनसाथी के बिना जीने की तैयारी Read More »

जीना सीखें मरने से पहले

जीना सीखें मरने से पहले Learn to Live Before You Die

हम केवल एक बार मरते हैं, लेकिन तब तक हमें हर दिन जीने का अवसर मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्र बढ़ना नहीं है। असली चुनौती है जीवन के अंत की प्रतीक्षा करना छोड़कर वर्तमान को पूरे उत्साह से अपनाना। दुर्भाग्य से अनेक वरिष्ठ नागरिक अनजाने में अपनी सेवानिवृत्ति के वर्षों

जीना सीखें मरने से पहले Read More »

वरिष्ठ नागरिकों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं

वरिष्ठ नागरिकों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं Elderly Care is Everyone's Responsibility

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत का हर पांचवां व्यक्ति 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का होगा। आज हर नौवां भारतीय वरिष्ठ नागरिक है और वर्ष 2035 तक यह संख्या बढ़कर हर सातवें व्यक्ति तक पहुंच जाएगी। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इस बात का संकेत हैं कि देश को तेजी

वरिष्ठ नागरिकों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं Read More »

दूसरी पारी में अच्छी सेहत का महत्व

The Importance of Good Health in the Second Innings दूसरी पारी में अच्छी सेहत का महत्व

बढ़ती उम्र में अच्छी सेहत सबसे बड़ा उपहार है। यही हमें बीमारियों से दूर रखती है, ऊर्जावान बनाए रखती है और आत्मनिर्भर होकर जीवन जीने का आत्मविश्वास देती है। दूसरी पारी का आनंद तभी लिया जा सकता है जब हमारा शरीर और मन दोनों हमारा साथ दें। हर व्यक्ति की उम्र, शरीर, जीवनशैली और स्वास्थ्य

दूसरी पारी में अच्छी सेहत का महत्व Read More »

वरिष्ठजन: अपना अहम् छोड़िए, खुश रहिए

वरिष्ठजन: अपना अहम् छोड़िए, खुश रहिए Elders - Let Go of Ego, Embrace Happiness

अहम् वह अदृश्य बोझ है जो हमें भीतर ही भीतर परेशान करता रहता है। याद रखिए, अहम् छोड़ने का अर्थ अपनी गरिमा छोड़ना नहीं है। सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश वरिष्ठजन अपने समय का सदुपयोग करने के लिए किसी सामाजिक संस्था, क्लब, धार्मिक संगठन, आरडब्ल्यूए या अपनी सोसायटी की गतिविधियों से जुड़ जाते हैं। यह एक

वरिष्ठजन: अपना अहम् छोड़िए, खुश रहिए Read More »

वरिष्ठजन के लिए डिजिटल भारत में मानवीय विकल्प आवश्यक

वरिष्ठजन के लिए डिजिटल भारत में मानवीय विकल्प Digital India Needs a Human Touch for Senior Citizensआवश्यक

देश तेजी से डिजिटल हो रहा है। बिजली का बिल हो, पानी का बिल, बैंकिंग, पेंशन, के.वाई.सी., टिकट बुकिंग, अस्पताल का पंजीकरण, सरकारी योजनाओं का लाभ या किसी भी प्रकार का प्रमाणीकरण—लगभग हर काम अब मोबाइल ऐप या ऑनलाइन माध्यम से होने लगा है। यह परिवर्तन समय की आवश्यकता भी है और इससे पारदर्शिता, गति

वरिष्ठजन के लिए डिजिटल भारत में मानवीय विकल्प आवश्यक Read More »

खुशियां जो कभी पुरानी नहीं होतीं

खुशियां जो कभी पुरानी नहीं होतीं Simple Joys Never Grow Old

एक समय था जब खुश रहने के लिए किसी बड़ी योजना की आवश्यकता नहीं होती थी। खुशियां अपने आप, चुपचाप और सहज ही जीवन में आ जाती थीं। गर्मी की छुट्टियों का नाम सुनते ही मन उत्साह से भर जाता था। स्कूल बंद होते और सालाना पारिवारिक यात्रा की तैयारी शुरू हो जाती। हमारे लिए

खुशियां जो कभी पुरानी नहीं होतीं Read More »

संस्कारों की विरासत: जिम्मेदारी किसकी?

संस्कारों की विरासत: जिम्मेदारी किसकी? The Values (Sanskar) Gap: Who Is Responsible?

आज जब भी हम मित्रों, रिश्तेदारों या परिचितों के बीच बैठते हैं, एक बात लगभग निश्चित रूप से चर्चा में आ जाती है—”आजकल बच्चे हमारी बात मानते ही नहीं।” कई लोग यह भी कहते हैं कि बच्चों पर दोस्तों या शिक्षकों की बात का असर अधिक होता है, जबकि माता-पिता और परिवार के बड़े पीछे

संस्कारों की विरासत: जिम्मेदारी किसकी? Read More »

बुजुर्गों में अकेलापन: एक खामोश महामारी

बुजुर्गों में अकेलापन: एक खामोश महामारी Loneliness Among Seniors: A Silent Pandemic

कोई दो वर्ष पूर्व मैंने एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था— “वरिष्ठों के अकेलेपन को समाज दूर करे।” आज पुनः उसी विषय पर लिख रहा हूं। इसका कारण एक ऐसा समाचार है, जिसने मन को भीतर तक विचलित कर दिया। बुजुर्गों में अकेलापन आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में एक गंभीर

बुजुर्गों में अकेलापन: एक खामोश महामारी Read More »

सुखमय सुनहरे वर्षों के लिए कुछ आदतें सुधारें

सुखमय सुनहरे वर्षों के लिए कुछ आदतें सुधारें Adapting Ourselves for Meaningful Golden Years

बुजुर्ग व्यक्तियों को याद होगा कि जब कोई व्यक्ति साठ वर्ष की आयु पार कर लेता था, तो अक्सर मजाक में कहा जाता था—”अरे, यह तो सठिया गया है।” इसका अर्थ यही होता था कि उसकी बातों को अधिक गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह अब पुरानी सोच या आदतों की बातें

सुखमय सुनहरे वर्षों के लिए कुछ आदतें सुधारें Read More »

हम संतोष करना सीखें

हम संतोष करना सीखें Be Happy With What You Have

मुझे पिछले दिनों एक बहुत ही सुंदर और शिक्षाप्रद सुविचार पढ़ने को मिला। उसमें लिखा था— “जो कम में खुश रहना सीख लेता है, उसकी खुशी कभी कम नहीं होती।” यह एक छोटी-सी पंक्ति है, लेकिन यदि हम इसके अर्थ को समझ लें तो जीवन की बहुत-सी परेशानियों का समाधान इसमें छिपा हुआ है। आजकल

हम संतोष करना सीखें Read More »

रिटायरमेंट के बाद रोजगार की चुनौतियां और समाधान

रिटायरमेंट के बाद रोजगार की चुनौतियां और समाधान Getting Employed Post Retirement Need More Than Experience

कुछ परिचित व्यक्तियों के साथ पिछले दिनों बैठा था। गप्प-शप चल रही थी। एक व्यक्ति, जो शहर की एक प्रसिद्ध स्वयंसेवी संस्था यानी एनजीओ से जुड़ा था, कहने लगा कि संस्था को एक एकाउंटेंट की आवश्यकता है। उसने सभी से आग्रह किया कि यदि किसी की नजर में कोई नौकरी पाने का इच्छुक व्यक्ति हो

रिटायरमेंट के बाद रोजगार की चुनौतियां और समाधान Read More »