बढ़ती उम्र में अच्छी सेहत सबसे बड़ा उपहार है। यही हमें बीमारियों से दूर रखती है, ऊर्जावान बनाए रखती है और आत्मनिर्भर होकर जीवन जीने का आत्मविश्वास देती है। दूसरी पारी का आनंद तभी लिया जा सकता है जब हमारा शरीर और मन दोनों हमारा साथ दें।
हर व्यक्ति की उम्र, शरीर, जीवनशैली और स्वास्थ्य अलग होता है। इसलिए इस उम्र में हमें अपनी परिस्थितियों के अनुसार जीवन जीना है, किसी और की नकल नहीं करनी है। किसी मित्र की दिनचर्या हमारे लिए उपयुक्त हो, यह आवश्यक नहीं। अपने शरीर की जरूरतों को समझना और उसी के अनुसार जीवनशैली अपनाना ही समझदारी है।
युवावस्था में हमारी कई आदतें—अनियमित दिनचर्या, असंतुलित भोजन, तनाव, व्यायाम की कमी और कुछ मामलों में तंबाकू या पान मसाले जैसी लत—धीरे-धीरे उन बीमारियों की नींव रख देती हैं, जिनका असर बढ़ती उम्र में सामने आता है। तब अक्सर मन में यह विचार आता है कि काश उस समय हमने अपनी सेहत पर थोड़ा और ध्यान दिया होता।
लेकिन बीते हुए समय को बदला नहीं जा सकता। घड़ी की सुइयों को उल्टा नहीं घुमाया जा सकता। आवश्यकता इस बात पर पछताने की नहीं कि पहले क्या गलत हुआ, बल्कि इस बात पर ध्यान देने की है कि आज से क्या सही किया जा सकता है। आज लिया गया एक सही निर्णय आने वाले वर्षों को बेहतर बना सकता है।
मैंने अपने कुछ मित्रों को वर्षों से पान मसाला खाते देखा है। अब जब स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं, तब भी उनके लिए इसे पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है। लत ऐसी होती है कि व्यक्ति कम तो कर देता है, लेकिन पूरी तरह छोड़ने का साहस या कहे तो इच्छा शक्ति नहीं जुटा पाता। इसलिए जितनी जल्दी अच्छी आदतें अपनाई जाएं, उतना ही अच्छा है।
अच्छी बात यह है कि बढ़ती उम्र में भी बहुत कुछ हमारे हाथ में है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या अपनाकर जोड़ों के दर्द, कमजोरी और अनेक पुरानी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य की रक्षा केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि हमारी दैनिक आदतों से होती है।
आइए, कुछ सरल बातों पर गंभीरता से विचार करें—
- संतुलित और पौष्टिक आहार
- नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या
- मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
- नियमित स्वास्थ्य जांच को आदत बनाएं
संतुलित और पौष्टिक आहार
उम्र बढ़ने के साथ पाचन शक्ति कुछ धीमी हो जाती है। इसलिए ऐसा भोजन करें जो आसानी से पचे और पर्याप्त पोषण भी दे। भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन अवश्य शामिल करें। दालें, अंकुरित अनाज, कम वसा वाले दुग्ध उत्पाद तथा आवश्यकता के अनुसार कैल्शियम और विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत रखने में सहायक होते हैं।
नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या
सक्रिय रहना बढ़ती उम्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम, जैसे तेज चलना, तैरना या साइकिल चलाना, करने की सलाह देते हैं। इसके साथ हल्के शक्ति-वर्धक और संतुलन वाले व्यायाम भी लाभदायक होते हैं। नियमित गतिविधि हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखती है तथा गिरने और फ्रैक्चर के खतरे को कम करती है।
मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी उतना ही आवश्यक है। नियमित पढ़ना, शब्द-पहेलिया या सुडोकू हल करना, नई चीजें सीखना या कोई नया शौक अपनाना मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। परिवार, मित्रों और समाज से जुड़े रहना अकेलेपन और तनाव को कम करता है। प्रतिदिन सात से नौ घंटे की अच्छी नींद भी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
नियमित स्वास्थ्य जांच को आदत बनाएं
कई गंभीर बीमारियां शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना समझदारी है। रक्तचाप, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य आवश्यक जांचों को नियमित रूप से कराते रहें। बीमारी का समय पर पता चल जाए तो उसका उपचार अधिक प्रभावी होता है और अनेक जटिलताओं से बचा जा सकता है।
याद रखिए, रिटायर होना या उम्र बढ़ना समस्या नहीं है। असली चुनौती अपनी सेहत की उपेक्षा करना है। यदि शरीर साथ देता रहे तो सपने देखने, नई बातें सीखने, समाज को कुछ लौटाने और जीवन का भरपूर आनंद लेने की कोई आयु सीमा नहीं होती।
दूसरी पारी को सार्थक, सक्रिय और आनंदमय बनाने की सबसे मजबूत नींव अच्छी सेहत ही है। इसलिए अपनी सेहत को प्राथमिकता दीजिए। यह केवल आपके लिए ही नहीं, बल्कि आपके परिवार की खुशी और आपकी आत्मनिर्भरता के लिए भी सबसे बड़ा निवेश है।
लेखक

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।




