जीना सीखें मरने से पहले

जीना सीखें मरने से पहले Learn to Live Before You Die

हम केवल एक बार मरते हैं, लेकिन तब तक हमें हर दिन जीने का अवसर मिलता है।

वरिष्ठ नागरिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्र बढ़ना नहीं है। असली चुनौती है जीवन के अंत की प्रतीक्षा करना छोड़कर वर्तमान को पूरे उत्साह से अपनाना। दुर्भाग्य से अनेक वरिष्ठ नागरिक अनजाने में अपनी सेवानिवृत्ति के वर्षों को केवल प्रतीक्षा का समय बना लेते हैं। जबकि सेवानिवृत्ति किसी प्रतीक्षालय का नाम नहीं, बल्कि जीवन की सार्थक दूसरी पारी की शुरुआत होनी चाहिए।

जीवन कभी भी केवल दिन गिनने का नाम नहीं होना चाहिए। हर सुबह बिस्तर से उठने का एक उद्देश्य होना चाहिए। केवल लंबी आयु का क्या लाभ, यदि उसमें उत्साह और जीवंतता ही न हो। सक्रिय जीवन का अर्थ है नई बातें सीखना, स्वयंसेवा करना, युवाओं का मार्गदर्शन करना, समाज के कार्यों में भाग लेना, पुराने शौक फिर से अपनाना, यात्रा करना, लिखना, पढ़ाना, बागवानी करना या वर्षों पहले जिम्मेदारियों के कारण अधूरा रह गया कोई सपना पूरा करना।

समाज ने भी अनेक वरिष्ठ नागरिकों के मन में यह धारणा बैठा दी है कि अब उन्हें पीछे हट जाना चाहिए और नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए। नई पीढ़ी को अवसर देना आवश्यक है, लेकिन इसका अर्थ स्वयं जीवन से किनारा कर लेना नहीं है। अनुभव बहुत मूल्यवान होता है। हर वरिष्ठ नागरिक अपने साथ दशकों का अनुभव, सफलताएं, असफलताएं और जीवन के अनमोल सबक लेकर चलता है। परिवार, समाज और देश इन अनुभवों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इस अमूल्य धरोहर को यूं ही व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।

यदि हम ईमानदारी से अपनी दिनचर्या का आकलन करें तो पता चल जाएगा कि हम वास्तव में जी रहे हैं या केवल समय काट रहे हैं। यह आकलन केवल मन में नहीं, बल्कि लिखकर करना चाहिए। जैसे ही हम लिखना शुरू करते हैं, हमारे विचार अधिक स्पष्ट होने लगते हैं और नए-नए विचार सामने आने लगते हैं। तब हम स्वयं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।

अपने आप से कुछ सरल प्रश्न पूछिए—

  • क्या मैं कल का उत्साहपूर्वक इंतजार करता हूं?
  • क्या मैंने पिछले एक महीने में कुछ नया सीखा है?
  • इस सप्ताह मैंने किसकी मदद की?
  • मैं आख़िरी बार दिल खोलकर कब हंसा था?
  • मैं अधिक समय चिंता में बिताता हूं या कुछ नया करने में?
  • यदि आज मेरा जीवन का अंतिम दिन हो, तो क्या मुझे लगेगा कि मैंने कल सचमुच जीवन जिया था?

इन प्रश्नों के उत्तर आपको स्वयं चौंका सकते हैं।

इन विषयों पर अपने विश्वसनीय मित्रों या परिवार के सदस्यों से भी चर्चा कीजिए। कभी-कभी दूसरे लोग हमारी उन संभावनाओं को पहचान लेते हैं जिन्हें हम स्वयं नहीं देख पाते। आवश्यकता पड़े तो विशेषज्ञ की सलाह लेने में भी संकोच नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार हम शारीरिक स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर की सहायता लेते हैं, उसी प्रकार जीवन को नए उद्देश्य के साथ जीने के लिए मार्गदर्शन लेना भी समझदारी है।

यह आत्ममूल्यांकन पूरी ईमानदारी से होना चाहिए। इसका उद्देश्य स्वयं की प्रशंसा करना या स्वयं को भ्रम में रखना नहीं है। केवल एक प्रश्न का सच्चा उत्तर खोजिए—क्या मैं उद्देश्यपूर्ण जीवन जी रहा हूं, या केवल समय बिता रहा हूं?

जिंदा रहने और जीवन जीने में बहुत अंतर होता है। जिंदा रहने का प्रमाण हमारी धड़कन है, जबकि जीवन जीने का प्रमाण हमारा उत्साह, जिज्ञासा और समाज के प्रति योगदान है।

अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के लिए आर्थिक तैयारी तो करते हैं, लेकिन भावनात्मक तैयारी बहुत कम लोग करते हैं। जबकि वास्तव में यही भावनात्मक तैयारी तय करती है कि सेवानिवृत्ति जीवन का सबसे सुखद अध्याय बनेगी या सबसे अकेला।

भावनात्मक स्वास्थ्य का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से भी है। सकारात्मक सोच हमें नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, सामाजिक मेलजोल और तनाव पर नियंत्रण की ओर प्रेरित करती है। उम्र बढ़ने की चुनौतियों को पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन मानसिक दृढ़ता हमें उनका सामना अधिक आत्मविश्वास और सकारात्मकता के साथ करने की शक्ति देती है। इसलिए सेवानिवृत्ति की तैयारी केवल बैंक बैलेंस बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मन को भी तैयार करना उतना ही आवश्यक है।

आर्थिक सुरक्षा जीवन में वर्षों को बढ़ाने में सहयोग कर सकती है, लेकिन भावनात्मक तैयारी उन वर्षों में जीवन का संचार करती है।

याद रखिए, उम्र हमें जीने से नहीं रोकती। हमें रोकती है जिज्ञासा का समाप्त हो जाना। जिज्ञासु मन कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वह हमेशा सीखता है, सिखाता है, साझा करता है और आगे बढ़ता रहता है।

‘नेवर से रिटायर्ड’ मिशन एक सरल विश्वास पर आधारित है—वरिष्ठ नागरिक समाज पर बोझ नहीं हैं, बल्कि देश की सबसे बड़ी अप्रयुक्त संपदा हैं। जिस दिन हम प्रतीक्षा छोड़कर फिर से सक्रिय योगदान देना शुरू कर देंगे, उसी दिन हमारे जीवन के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन शुरू हो जाएगा।

इसलिए जीवन समाप्त होने से पहले सचमुच जीना शुरू कीजिए। आखिर हम केवल एक बार मरते हैं, लेकिन तब तक हमें हर दिन उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का एक नया अवसर मिलता है।

लेखक

विजय मारू
विजय मारू

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *