मैं आज के अपने लेख में आपको कोई नई बात बताने नहीं जा रहा हूं। हां, एक बार फिर यह प्रयास जरूर रहेगा कि हम सब अपने जीवन के इस पड़ाव पर खुशी बटोरने के अधिक से अधिक अवसर तलाशते रहें।
जिन बातों की आज हम चर्चा करेंगे, उन्हें मैं अपने पिछले लेखों में कई बार उजागर कर चुका हूं। आप सब इतने अनुभवी हैं कि शायद इन विषयों पर मुझे ही बहुत कुछ सिखा सकते हैं। फिर भी मुझे इन्हीं बातों को दुबारा-तिबारा लिखने में कोई झिझक नहीं है। आखिर जिंदगी में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें जानना ही नहीं, बल्कि बार-बार याद करना भी जरूरी होता है।
सबसे पहला मंत्र तो वही पुराना है — अपने रिश्तों को मधुर बनाए रखें। ये रिश्ते दोस्तों के साथ हों या परिवार के साथ। उम्र बढ़ने के साथ इन रिश्तों की बहुमूल्यता शायद पहले से कहीं ज्यादा समझ में आने लगती है।
समय के साथ हम एक-एक करके अपने मित्रों को खोते जाते हैं। परिवार के बड़े भी धीरे-धीरे हमसे विदा लेते जाते हैं। ऐसे में हमारे पास जो रिश्ते बचे हैं, वही हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। इसलिए मन में कोई नाराजगी हो तो उसे बहुत लंबे समय तक न पालें। किसी से बात करनी हो तो आज ही कर लें। किसी को धन्यवाद देना हो तो आज ही दें। और किसी से माफी मांगनी हो तो उसमें भी देर न करें।
अकेलापन शायद जिंदगी के अंतिम वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती है। आजकल तो कुछ प्रोफेशनल सेवाएं भी उपलब्ध हैं। कई स्टार्टअप ऐसे हैं जो जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति को आपके साथ समय बिताने के लिए उपलब्ध कराते हैं — आपसे बातचीत करने, बाहर टहलने, मंदिर या मॉल जाने तक में साथ देने के लिए। उनका शुल्क अक्सर घंटे के हिसाब से तय होता है। यह बदलते समय की जरूरत का संकेत है। लेकिन पैसे देकर मिलने वाली संगत और अपनेपन से मिलने वाले रिश्तों में फर्क तो रहेगा ही। इसलिए अपने रिश्तों को अभी से मजबूत बनाना जरूरी है।
दूसरा महत्वपूर्ण मंत्र है — अपनी स्थिति को स्वीकार करना।
हर दिन हम थोड़े और उम्रदराज हो रहे हैं। भगवान ने जिंदगी की रचना ही ऐसी की है। इसलिए बढ़ती उम्र से मन ही मन लड़ते रहना कोई समझदारी नहीं है। हम हमेशा जवान नहीं रह सकते। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि उम्र बढ़ने के साथ जिंदगी का आनंद समाप्त हो जाए।
सही जीवनशैली, संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच के सहारे हम अपने स्वस्थ और सक्रिय वर्षों को काफी आगे तक ले जा सकते हैं। यही हमारे गोल्डन इयर्स को वास्तव में सुनहरा बना सकता है।
लाइफस्टाइल की बात करें तो रोज व्यायाम करना, योगाभ्यास करना और कुछ समय वॉक के लिए निकालना बहुत जरूरी है। इसके लिए किसी बहुत कठिन कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं। अपनी क्षमता और उम्र के अनुसार नियमित रूप से कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि करते रहना ही काफी महत्वपूर्ण है। शरीर को सक्रिय रखेंगे तो मन भी अधिक सक्रिय और प्रसन्न रहेगा।
इसी तरह खान-पान पर भी अब विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जवानी में हमने स्वाद के पीछे भागते हुए बहुत कुछ बिना सोचे-समझे खाया होगा। ज्यादा मसालेदार खाना, मिठाइयाँ और ऐसी कई चीजें जिनका आनंद उस समय तो खूब लिया, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शरीर उन्हें उसी तरह स्वीकार नहीं करता।
अब स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को महत्व देना होगा। पेट की जलन और एसिडिटी आज बहुत आम समस्या बन गई है और कई लोगों को इसकी दवाएं नियमित लेनी पड़ती हैं। डायबिटीज भी बहुत सामान्य हो गई है। इसमें थोड़ी सी लापरवाही आगे चलकर शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकती है। इसलिए उम्र के इस पड़ाव पर संयम कोई सजा नहीं, बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कीमत है।
लेकिन खुशी केवल अच्छे स्वास्थ्य से नहीं मिलती। खुश रहने के लिए खुद को व्यस्त और उपयोगी बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। रिटायरमेंट का अर्थ काम से विदाई हो सकता है, जिंदगी से नहीं। अपनी रुचि का कोई काम चुनिए — पढ़िए, लिखिए, संगीत सुनिए, बागवानी कीजिए, यात्रा कीजिए, किसी सामाजिक संस्था से जुड़िए या किसी जरूरतमंद की मदद कीजिए।
और सबसे महत्वपूर्ण — अपनी खुशी को दूसरों पर निर्भर मत कीजिए। बच्चे अपने जीवन में व्यस्त होंगे, मित्र हमेशा उपलब्ध नहीं होंगे और परिस्थितियाँ हमेशा हमारे मन मुताबिक नहीं होंगी। इसलिए छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढने की आदत डालिए।
सुबह की सैर, किसी पुराने मित्र का फोन, परिवार के साथ बैठकर चाय पीना, किसी बच्चे को कुछ सिखाना, किसी की मदद करना या दिन के अंत में यह महसूस करना कि आज का दिन बेकार नहीं गया — ये छोटी बातें ही मिलकर बड़ी खुशी बनाती हैं।
आखिरकार, खुश रहने का सबसे बड़ा मंत्र शायद यही है — जो हमारे पास है, उसकी कद्र करें; जो नहीं है, उसके लिए लगातार दुखी न रहें; और जो समय हमारे पास बचा है, उसे शिकायत में नहीं, मुस्कुराहट में बिताएं।
लेखक

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।




