आवश्यकता अनुसार आज हम बुजुर्ग भी अपनी जिंदगी के हर दिन टेकनोलोजी का उपयोग अवश्य करते हैं। इसकी आवश्यकता भी जरूरी हो गई है। अपना बिजली का बिल पेमेंट, इंश्योरेंस का प्रीमियम, बैंक का कोई ट्रांजैक्शन करना हो या किसी से कुछ पैसा मंगाना – भेजना हो, आज सब कुछ अपने फोन पर एक क्लिक से किया जा सकता हैं। अपने घर के लिये रोज का राशन और फल सब्जी भी आप अपने फोन से आर्डर कर मंगवा सकते हैं और पेमेंट भी घर पर जब सामान आ जाए उसी फोन से कर सकते हैं। परेशानी उस समय आती है जब हमारे पास साधन होते हुए भी हम उसका उपयोग सही ढंग से नहीं कर सकते हैं अपने अज्ञानता के कारण।
अपने चारों तरफ जब हम नजर घुमाते हैं तो पाते हैं कि हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन तो है और वह उसका उपयोग बहुत हद तक अपने प्रिय जनों से संपर्क करने में लगाता भी है, फिर वह चाहे उनसे बात करने में या व्हाट्सएप द्वारा मैसेज के आदान प्रदान करने में लगाये। स्मार्टफोन पर और वाट्सएप पर इतनी सुविधाएं हैं, पर हम इनका उपयोग तो अपनी समझ के अनुसार काफी कम ही करते हैं। बहुत बुजुर्गो को वीडियो कॉल करने में असहजता महसूस होती हैं जबकि यह एक ऐसा साधन है कि बुजुर्ग जब दूर भी हो अपने परिवार जनो से एक दूसरे को देखकर बातें कर सकते हैं। और भी कई साधन है एक दूसरे से ग्रुप में बात करने के जैसे कि गूगल मीट या जूम, पर सबसे प्रचलित तो व्हाट्सएप ही है।
हममें से कितनो को जानकारी हैं कि हम अपने वाट्सएप मैसेज को, जो कि हम स्मार्टफोन पर देखते हैं, इसे अपने लेफट़ॉप पर भी देख सकते है। आप जब किसी से बात कर रहे होते है वाट्सएप पर तो इस बात को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं। यह भी देख सकते हैं कि आप जिससे संपर्क में है वो ऐप पर कब सक्रिय हैं और क्या वो संदेश टाइप कर रहे हैं या वे आखिरी बार बाट्सएप पर कब सक्रिय थे। व्हाट्सएप उपयोगकर्ता यह देख सकते है कि उनका संदेश कब भेजा गया, वितरित किया गया और प्राप्तकर्ता द्वारा कब पढ़ा गया। स्क्रीन शेयरिंग की सुविधा भी उपलब्ध है जिससे आप अपनी स्क्रीन पर मौजूद सामग्री को वास्तविक समय पर साझा कर सकते है। अपनी स्क्रीन शेयर करने के लिए आपको वीडियो कॉल में होना होगा। व्हाट्सएप कुछ समय पहले इन-चैट भुगतान की सुविधा उपलब्ध करायी है। खास बात इस एप की यह हैं कि व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग करता है, जो एक सुरक्षित संचार प्रोटोकॉल है। इससे केवल बातचीत में शामिल पक्षों को एक-दूसरे के संदेशों को देखने की अनुमति वाट्सएप देता है।
इसी तरह गूगल से कोई जानकारी प्राप्त करने में सभी वरिष्ठ जन बहुत सक्षम नहीं होते हैं या गूगल मैप्स का उपयोग कर कहीं पहूंचना कठिन हो जाता है, उनके लिए। अपने स्मार्टफोन पर किसी की बात रिकॉर्डिंग करना, वीडियो बनाना, जोड़-घटाव वगैरह करना नौजवानो को तो बहुत आसान लगेगा पर बुजुर्ग व्यक्तियों को तो इसके लिए प्रशिक्षित होना होगा।
इसी डिजिटल डिवाइड को पाटना एक मुख्य चैलेंज है। इस कार्य को करने में सबसे ज्यादा सहयोग तो घर में नौजवान और छोटे बच्चे, जो कि आजकल इसमें बहुत निपुण है, कर सकते हैं। यह जिम्मेदारी घर में इन्हीं छोटे उम्र के लोगों की है कि वह बुजुर्गो को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे सकें।
आजकल ऑनलाइन क्लासेज भी ये प्रशिक्षण देने के लिए शुरू हुई है। इसका भी उपयोग करना चाहिए। यूट्यूब पर भी खूब जानकारी बहुत अच्छे तरीके से वीडियो के द्वारा बताई गई है, लेकिन सबसे पहले बुजुर्गो को यह तो बताना ही होगा कि ऑनलाइन इसका उपयोग कैसे करें या यूट्यूब से सीखने के लिए अपने स्मार्टफोन का उपयोग कैसे करें। अपने सवाल का गूगल, चेट-जीपीटी या अन्य प्लेटफार्म से पूछ कर बहुत उपयोगी उत्तर पाया जा सकता हैं। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा भी फ्री डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम चलाया जाता है, इसके विषय में भी जानकारी ली जा सकती है।
ट्रेनिंग इसकी भी होनी चाहिए की मजबूत पासवर्ड कैसे बनाया जाए और इसकी आवश्यकता क्यों है वरिष्ठ जन के लिए। कुछ विशेष एप्स भी उपलब्ध है वरिष्टजन के लिए, जो बहुत अच्छे हैं। इसके विषय में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
इन सब जानकारियों के साथ बुजुर्गो को यह भी सीखना बहुत आवश्यक है की ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे अपने आप को बचाएं। आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी के केस बहुत ज्यादा हो रहे हैं। इसी तरह आजकल एक नया फ्रॉड चला है डिजिटल अरेस्ट का। (इस विषय पर मेरा लेख, जिसका शिर्षक था, डिजिटल एरेस्ट का वरिष्टजन पर मंडराता खतरा, इस लिंक पर पढे़) रोज अपने दैनिक अखबार में इसके समाचार पढ़ने को मिल जाएंगे। सरकार भी बहुत सचेत हुई है और जागरुकता संदेश प्रचारित करती रहती हैं। पर ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए हमें पूरा प्रयास करना होगा।
सबको मिलकर वरिष्ट जन के बीच डिजिटल साक्षरता का बढ़ाने का कार्य प्राथमिकता पर करना चाहिए।
लेखक

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कोई सोलह सौ सदस्य बन चुके है।
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