पांच वर्ष का सफर : नेवर से रिटायर्ड — एक अभियान, एक दृष्टि

विजय मारू

शुरुआत : एक विचार से अभियान तक (2020–2021)

नेवर से रिटायर्ड मिशन का औपचारिक शुभारम्भ जनवरी 2021 में हुआ, हालांकि इसका विचार कुछ माह पहले ही मन में आकार लेने लगा था। उस समय मुझे एक विरोधाभास लगातार परेशान कर रहा था। एक ओर औसत आयु बढ़ रही थी और लोग अधिक स्वस्थ जीवन जी रहे थे, वहीं दूसरी ओर 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति को जीवन की पूर्णविराम रेखा मान लिया गया था।

सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ा देना समाधान नहीं था, क्योंकि इससे युवाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। वास्तविक समस्या यह थी कि 30–35 वर्षों का अनुभव, ज्ञान और विवेक रखने वाले सेवानिवृत्त नागरिक—जो देश की अमूल्य पूंजी हैं—अनुपयोगी छोड़ दिए जा रहे थे। यदि इस अनुभव को सकारात्मक दिशा में लगाया जाए, तो यह राष्ट्र-निर्माण में बड़ी भूमिका निभा सकता है। यही नेवर से रिटायर्ड की आधारशिला बनी।

एक मित्र की सहायता से वेबसाइट बनी और यह यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हुई।

प्रारम्भिक प्रयास : जागरूकता और जुड़ाव

शुरुआत में ध्यान वरिष्ठजनों से जुड़े प्रसंगों और सकारात्मक उदाहरणों को साझा करने पर रहा। समाचार-पत्रों, डिजिटल मीडिया और वास्तविक जीवन से प्रेरित कहानियां वेबसाइट और फेसबुक समूह पर पोस्ट की जाने लगीं।

एक घटना विशेष रूप से उल्लेखनीय रही—एक वृद्ध महिला की जान केवल इसलिए बच सकी क्योंकि वह एक व्हाट्सऐप समूह का हिस्सा थीं, जहां हर सुबह सभी सदस्य अपनी उपस्थिति दर्ज करते थे। एक दिन उनके उत्तर न देने पर साथी सदस्यों ने चिंता जताई, घर जाकर देखा और उन्हें अचेत अवस्था में पाया। समय पर अस्पताल पहुंचाने से उनकी जान बच गई। जब इस उदाहरण को साझा कर ऐसे समूह बनाने का आग्रह किया गया, तो कई लोगों ने इसे अपनाया। इसने यह विश्वास और मजबूत किया कि छोटे प्रयास भी जीवनरक्षक बन सकते हैं।

लेखन : प्रेरणा का सशक्त माध्यम

इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के बाद नियमित लेखन आरम्भ हुआ। उद्देश्य था—वरिष्ठजनों को सक्रिय, संलग्न और सकारात्मक बने रहने के लिए प्रेरित करना। मूल दर्शन स्पष्ट था: दूसरों की मदद करके हम वास्तव में अपनी ही मदद करते हैं। सक्रियता से शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मानसिक सजगता बनी रहती है और नकारात्मकता स्वतः दूर होती है। अब तक लगभग 100 लेख लिखे जा चुके हैं, जो वरिष्ठजनों से जुड़े मुद्दों, अवसरों और प्रेरणाओं पर केन्द्रित हैं।

फुटपाथों की दुर्दशा और उसके कारण वरिष्ठजनों की पैदल चलने की आदत पर पड़ने वाले प्रभाव पर लिखा गया एक लेख अत्यंत चर्चित रहा। इस विषय पर माननीय प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा गया, क्योंकि वरिष्ठ-अनुकूल अधोसंरचना सार्वजनिक स्वास्थ्य का ही एक आयाम है।

नीति और पक्ष-प्रस्तुति (Advocacy)

समय के साथ नेवर से रिटायर्ड केवल प्रेरणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नीति-स्तर पर संवाद की दिशा में भी आगे बढ़ा। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं पेशेवरों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया गया। इस संबंध में प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखे गए और लेख भी प्रकाशित हुआ।

इसी क्रम में वृद्धाश्रमों की बढ़ती आवश्यकता, उनकी संख्या, नियमन तथा न्यूनतम सुविधाओं पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। बदलते पारिवारिक ढांचे और बढ़ती आयु के साथ वृद्धाश्रम अब सामाजिक विफलता नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता हैं। नेवर से रिटायर्ड के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री को इस विषय पर विस्तार से अवगत कराया गया, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और मानवीय जीवन मिल सके।

डिजिटल विस्तार

वरिष्ठजनों तक व्यापक पहुंच के लिए यूट्यूब चैनल शुरू किया गया, जहां 100 से अधिक वीडियो उपलब्ध हैं—सभी वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विषयों पर। इसके अतिरिक्त फेसबुक समूह व पेज, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, लिंक्डइन तथा हाल ही में शुरू किया गया व्हाट्सऐप चैनल भी सक्रिय हैं।

मान्यता और सहभागिता

आवासीय परिसरों और वरिष्ठ नागरिक समूहों से संबोधन के निमंत्रण मिलने लगे। एक सुखद क्षण तब आया जब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के एक अधिकारी ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी जागरूकता सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। यह संकेत था कि यह अभियान अब संस्थागत स्तर पर भी पहचाना जा रहा है।

हर तरफ से मिल रही सराहना

इस मिशन को महत्वपूर्ण हस्तियों और कई मित्रों एवं रिश्तेदारों से सराहना मिलने लगी। कई संतों और सार्वजनिक हस्तियों ने संदेश भेजे, जिनके प्रशंसापत्र वेबसाइट पर दर्ज किए गए हैं। मुझे बहुत प्रोत्साहन मिला जब न्यूजीलैंड से किसी ने फोन करके अपनी 75 वर्षीय मां के लिए सुझाई जाने वाली गतिविधियों के बारे में पूछा, या जब सिलीगुड़ी से किसी ने उस वृद्धाश्रम के बारे में और जानकारी मांगी जिसके बारे में मैंने अपने हालिया लेख में लिखा था। कई शुभचिंतकों ने मुझे प्रतिदिन संदेश/वीडियो भेजने शुरू कर दिए हैं, जो मेरे मिशन से संबंधित हैं। वास्तव में, इनसे मुझे अपने लेखन में मदद मिल रही है।

आगे की राह

पांच वर्षों में नेवर से रिटायर्ड एक विचार से आंदोलन की दिशा में बढ़ा है। मूल विश्वास आज भी अटल है—

सेवानिवृत्ति जीवन से विदाई नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण योगदान के एक नए चरण की शुरुआत है।

लेखक

विजय मारू
विजय मारू

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।

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