पिछले दिनों एक परिचित 87 वर्षीय महिला बाथरूम में गिर गईं। दुर्भाग्यवश उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया और वे कोमा में चली गईं। इस आयु में ऐसी घटनाएं अब अक्सर सुनने को मिल जाती हैं। परंतु सबसे अधिक पीड़ा इस बात की हुई कि इतनी अधिक उम्र में भी वे बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद करके उपयोग करती थीं। उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
जब काफी देर तक वे बाहर नहीं आईं, तो परिजनों ने दरवाजा खटखटाया। कोई उत्तर न मिलने पर दरवाजा तोड़ा गया और वे ज़मीन पर अचेत अवस्था में पाई गईं। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
कहने का तात्पर्य यह है कि बुजुर्ग व्यक्तियों को बाथरूम का उपयोग करते समय दरवाज़ा अंदर से बंद नहीं करना चाहिए। निजता आवश्यक है, पर सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण। इसका एक अत्यंत सरल समाधान एक सजग व्यक्ति ने अपनाया—उन्होंने बाथरूम के भीतर पर्दा लगवा लिया। दरवाज़ा केवल बंद किया, चिटकनी नहीं लगाई, परदा खींचा, और समस्या का समाधान हो गया। पहले के समय में यह आम बात थी, और आज भी कई घरों में यह व्यवस्था देखने को मिल जाती है।
आज के इस लेख में हम ऐसी ही कुछ और छोटी-छोटी, पर अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इनमें से कुछ बिंदु पहले के लेखों में भी आए होंगे, पर दोहराना आवश्यक है। अपने जीवन के सुनहरे वर्षों में इन साधारण सावधानियों को अपनाकर हम अनेक बड़ी परेशानियों से बच सकते हैं।
कुछ आवश्यक सावधानियां:
- बाथरूम में ग्रैब बार्स या सपोर्ट हैंडल अवश्य लगवाएं।
- एंटी-स्किड मैट का प्रयोग सुनिश्चित करें।
- बाथरूम में पहनने वाली चप्पलों की सोल घिसी हुई न हो।
- बाथरूम को यथासंभव सूखा रखने पर विशेष ध्यान दें।
- सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय साइड रेलिंग को अवश्य पकड़ें। आवश्यकता हो तो नई रेलिंग लगवाएं।
- जिन कुर्सियों में व्हील लगे हों, उनका उपयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
यदि पीछे रखा कोई सामान उठाना हो, तो केवल हाथ पीछे घुमाकर उसे उठाने का प्रयास न करें। इसके बजाय अपने पूरे शरीर को मोड़ें और फिर सामान उठाएं। इससे जोड़ों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। कई बार गलत ढंग से सामान उठाने पर नस चढ़ जाती है, और ठीक होने में लंबा समय लग जाता है।
अब थोड़ी चर्चा मोबिलिटी—अर्थात चलने-फिरने की क्षमता—पर। बढ़ती उम्र में हमें अपने पैरों पर विशेष ध्यान देते हुए चलने की प्रक्रिया को मस्तिष्क में केंद्रित करना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ चलते समय हमारे पैर पहले जितने ऊपर नहीं उठते, जिससे ठोकर लगने की संभावना बढ़ जाती है। ज़मीन पर बिछी साधारण-सी मैट भी कभी-कभी बाधा बन सकती है। एक मामूली-सी मोच भी बुजुर्गों के लिए लंबे समय की परेशानी का कारण बन सकती है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि चलते समय पैरों पर नहीं, बल्कि सामने की दिशा पर ध्यान रखें।
- चलते समय मोबाइल फोन का उपयोग कतई न करें।
घर को बुजुर्ग-अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। यथासंभव वरिष्ठ व्यक्तियों के लिए नीचे के तल पर रहने की व्यवस्था होनी चाहिए। बाथरूम के भीतर आवश्यक प्रबंधों पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है। घर की ज़मीन गीली न रहे, और जब सफ़ाई हो रही हो, उस समय बुजुर्गों का एक स्थान पर बैठा रहना ही बेहतर होता है।
वैसे तो किसी भी उम्र का व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो सकता है, पर बुजुर्गों को विशेष ध्यान रखना ही होगा। एक बात जो कई वरिष्ठजनों में देखने को मिलती है, वह यह कि वे यह मानने को तैयार नहीं होते कि अब उनकी उम्र बढ़ चुकी है। भारी सामान उठाने से तो बचना ही चाहिए, हल्का सामान उठाने से भी परहेज करना आवश्यक है, खासकर आगे झुककर। स्लिप-डिस्क या फ्रोजन शोल्डर आजकल आम समस्याएं हो गई हैं। ये ऐसी असुविधाएं हैं जिनके ठीक होने में महीनों लग जाते हैं और दर्द भी काफ़ी होता है। अधिक दर्द निवारक दवाएं लेने से अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
मैंने यहां कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी सावधानियों का उल्लेख किया है। हम सबके जीवन में ऐसे अनेक अनुभव रहे होंगे, जिनसे दूसरों को सीख मिल सकती है। यदि हम अपने अनुभव साझा करें, तो किसी और की बड़ी दुर्घटना टल सकती है।
आप Never Say Retired की वेबसाइट, फ़ेसबुक पेज या व्हाट्सएप चैनल पर अपने विचार साझा करें। ऐसे और बिंदु बताइए जिनसे अन्य वरिष्ठजन सतर्क हो सकें।
आपका एक अनुभव किसी के लिए सुरक्षा कवच बन सकता है।
लेखक

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।




