सौवां लेख — 100 लेखों से 100 वर्षों की प्रेरणा

सौवां लेख — 100 लेखों से 100 वर्षों की प्रेरणा The 100th Article – Inspiration for Living 100 Years

मुझे स्वयं भी आश्चर्य होता है कि मैं अपने मिशन नेवर से रिटायर्ड के केवल एक ही विषय पर इतने अधिक लेख कैसे लिख पाया। इस मिशन का मूल विचार है—वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय, संलग्न और सम्मानित बने रहने के लिए प्रेरित करना।

मुझे याद है, एक वर्ष से भी अधिक पहले मेरे एक मित्र ने मुझसे पूछा था कि मैं हर सप्ताह केवल वरिष्ठ नागरिकों पर लिखने के लिए नए विषय कैसे खोज पाऊंगा।

परंतु वास्तव में मेरे मित्रों के ही सुझाव और सहयोग ने मुझे इस पड़ाव तक पहुंचने में सहयोग किया है, और मैं यथासंभव आगे भी लिखता रहूंगा। नेवर से रिटायर्ड मिशन की सराहना करने वाले मित्र अब उन विषयों में भी महत्वपूर्ण योगदान देने लगे हैं जिन्हें मैं अपने लेखों में उठाता हूं। मुझे इस विषय से जुड़े दर्जनों संदेश प्राप्त होते हैं—कभी वीडियो के रूप में, कभी छोटे संदेशों के रूप में—जो उन्हें अपने विभिन्न समूहों में प्राप्त हुए होते हैं।

मुझे तो लगता है कि यदि समय हो और उन्हें पढ़ने वाले लोग मिलते रहें, तो प्रतिदिन भी एक लेख लिखा जा सकता है। यह सौवां लेख अपने आप में निरंतरता, समर्पण और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मैंने विभिन्न विषयों पर लिखा है, और कुछ विशेष विषयों पर एक से अधिक लेख भी लिखे हैं। कई महत्वपूर्ण विषयों पर पाठकों की उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं भी मिलीं। उदाहरण के लिए—जो वरिष्ठ मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं, वे अधिक प्रसन्न रहते हैं; सामाजिक सहभागिता अकेलेपन को दूर करती है; जीवन का उद्देश्य हमारी ऊर्जा को जीवित रखता है; और छोटी-छोटी दैनिक आदतें भी आगे के वर्षों में बड़ा अंतर ला सकती हैं – इन लेख पर औसतन प्रतिक्रियाएं काफी आई।

इस सौवें लेख को लिखते समय मुझे फरवरी 2025 में लिखा अपना एक लेख याद आता है, जिसका शीर्षक था—“वरिष्ठजन, सेंचुरी लगाने के लिए अनुशासित बनिए।” आज एक बार फिर यह विषय लिखने के लिए बहुत उपयुक्त प्रतीत होता है। इसलिए यह मेरा सौवां लेख है, जिसे मैं अपने मित्रों को समर्पित करते हुए उनसे आग्रह करता हूं कि वे ऐसा जीवन जिएं जिससे वे भी इस जादुई आंकड़े तक पहुंच सकें।

कुछ दिन पहले मैंने हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की एक छोटी-सी वीडियो रील देखी। उसमें वे बता रहे थे कि उनके जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर एक नेता ने उन्हें फोन कर कहा कि अब तो वे 75 वर्ष के हो गए हैं। इस पर मोदी जी ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया—“अभी 25 साल बाकी हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि वे बीते हुए वर्षों की गिनती नहीं करते, बल्कि आगे बचे हुए वर्षों को गिनते हैं। अर्थात जीवन में जो बीत गया है, उसकी गिनती में समय नष्ट करने के बजाय जो शेष है उसे सार्थक ढंग से जीने के बारे में सोचना चाहिए। यह कितनी सकारात्मक सोच है—और शायद यही उनके स्वस्थ रहने और देश के लिए निरंतर कार्य करते रहने का रहस्य भी है।

सनातन धर्म और वेदों में मनुष्य की आदर्श आयु 100 वर्ष (शतायु) मानी गई है। वेदों, उपनिषदों और अन्य धर्मग्रंथों में लंबी और स्वस्थ आयु के लिए “शतं वर्षाणि” अर्थात सौ वर्षों तक जीने की कामना और प्रार्थनाएं मिलती हैं।

सनातन शास्त्रों में 100 वर्ष की आयु से संबंधित कुछ प्रमुख उल्लेख इस प्रकार हैं—

  1. वेदों में ‘शतायुः पुरुषः’ का उल्लेख: यजुर्वेद और अथर्ववेद में मनुष्य के लिए सौ वर्षों की आयु की कल्पना की गई है—
शतायुः पुरुषः शतेन्द्रियः।

(अर्थ : मनुष्य शतायु हो, और उसकी सभी शक्तियाँ पूर्ण रूप से सक्रिय रहें।)

  1. ईशावास्य उपनिषद का संदेश: ईशावास्य उपनिषद (श्लोक 2) में कहा गया है कि मनुष्य को सौ वर्षों तक कर्म करते हुए जीने की इच्छा करनी चाहिए—
कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतं समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे॥
  1. अथर्ववेद की प्रार्थना: अथर्ववेद में एक सुंदर प्रार्थना है जिसमें सौ वर्षों तक देखने, सुनने और जीवन जीने की कामना की गई है—
पश्येम शरदः शतम्, जीवेम शरदः शतम्,
बुध्येम शरदः शतम्, रोहेम शरदः शतम्,
पुषेम शरदः शतम्, भवेम शरदः शतम्।

अर्थात हम सौ वर्षों तक देखें, सौ वर्षों तक जीवित रहें, सौ वर्षों तक समझते-सीखते रहें और सौ वर्षों तक उन्नति करते रहें।

हर वरिष्ठ व्यक्ति छोटे-छोटे अनुशासित कदमों के माध्यम से सार्थक और स्वस्थ सौ वर्षों की ओर बढ़ सकता है। उम्र जीवन से पीछे हटने का संकेत नहीं है—यह तो जीवन को और अधिक समझदारी और अनुभव के साथ जीने का एक आमंत्रण है।

आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद ही मुझे इस मंज़िल तक पहुंचा पाया है। आप सभी का हृदय से धन्यवाद। मुझे विश्वास है कि आगे की इस यात्रा में भी आपका साथ मिलता रहेगा और हम सब मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन में नई रोशनी लाने तथा उनके स्वर्णिम वर्षों को अधिक प्रसन्न, सक्रिय और स्वस्थ बनाने के इस प्रयास को सफल बनाएंगे।

लेखक

विजय मारू
विजय मारू

लेखक नेवर से रिटायर्ड मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप नेवर से रिटायर्ड फोरम के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।

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