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title: बढ़ती उम्र में खुश रहने की कला
author:
  name: विजय मारू
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date: '2025-12-05T14:36:17+05:30'
modified: '2025-12-05T14:36:18+05:30'
type: post
categories:
  - Age Power
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# बढ़ती उम्र में खुश रहने की कला

उम्र हमारी बढ़ती जा रही है। शरीर पहले जैसा चपल नहीं रहा – थोड़ी-थोड़ी कमजोरी महसूस होती है, कदम पहले जितने फुर्तीले नहीं रहते, और लंबे समय तक चहलकदमी भी अब डर का कारण बन जाती है। जवानी तो दूर, कुछ वर्ष पहले वाली ऊर्जा भी अब कभी-कभी सपने जैसी लगती है।

लेकिन इसके बावजूद हम दिन भर किसी न किसी काम में लगे ही रहते हैं। एक रूटीन बन गई है – सुबह उठिए, कुछ नियमित काम कीजिए, घर-परिवार की छोटी-मोटी जिम्मेदारियां निभाइए, और देखते-देखते शाम ढल जाती है। रात आती है तो थकान के बावजूद नींद पूरी आने में दिक्कत होती है। अगली सुबह फिर वही क्रम। ऐसा लगता है मानो जीवन एक चक्र में फंसा हुआ है, जो हमें आगे बढ़ने नहीं दे रहा।

अब वह समय आ गया है जब हम रुककर सोचें – क्या हमने कभी अपने लिए सचमुच समय निकाला है? क्या हमने खुद को खुश रहने का अधिकार दिया है?

हमारी जिम्मेदारियां बहुत हद तक पूरी हो चुकी हैं। बच्चे बड़े हो गए, उन्होंने अपने परिवार संभाल लिए। कई तो अब खुद दादा-दादी या नाना-नानी बन चुके हैं। अब वह समय है जब हम अपने जीवन को नए ढंग से देखें – उस नजर से जो खुशी, हल्केपन और आत्मसंतोष की तलाश करती हो।

### बच्चों को समझाने का समय अब बीत चुका है

कुछ समय पहले मेरी एक 90 वर्षीय सज्जन से बातचीत हुई। उनके बेटे, जो अमेरिका में रहते हैं, उनसे मिलने भारत आए थे। बेटे की जीवनशैली देखकर उस सज्जन की पत्नी बोलीं—“बच्चें को समझाना चाहिए कि जिंदगी किस तरह चलानी है।” मैं मुस्कुराया और कहा, “अरे, वह अब 65 वर्ष का हो गया है। वह अब अपने बच्चों को समझाता है कि जिंदगी कैसे चलती है!” यह बात गहरे तक जाती है – हमारे बच्चों के बच्चे अब बड़े हो रहे हैं, और हम अभी भी सोचते हैं कि हमें अपने बच्चों को समझाना चाहिए! अब “समझाने” का समय नहीं – स्वयं को समझने और अपनी खुशी खोजने का समय है।

### अब खुद से पूछिए – मेरी खुशी कहां बसती है?

यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। जब जीवन के इतने वर्ष जिम्मेदारियों में बीतें, तब यह सवाल पूछना जरूरी हो जाता है – मुझे क्या करने में खुशी मिलती है? अब जीवन को खुशहाल बनाने के लिए मैं क्या-क्या कर सकता हूं?

अगर आपको दोस्तों से बात करने में खुशी मिलती है, तो फिर क्यों न हफ्ते में दो-तीन बार उनसे बातचीत को छोटा सा उत्सव बना दें? आज मोबाइल फोन हमारे हाथ में है – बस बटन दबाइए और दोस्त की आवाज कानों में गूंज उठेगी। बहुत से लोग सोचते हैं—“कहीं मैं फोन करके परेशान तो नहीं कर दूँ?” लेकिन यही हिचक हमें खुशी से दूर कर देती है। याद रखिए – आपके मित्र भी उतनी ही उत्सुकता से आपकी कॉल का इंतजार शायद कर रहें होंगे।

### गाना, यादें और पुरानी महफिलें – इससे बेहतर खुशी और क्या!

कई वरिष्ठ जन अपने दोस्तों के बीच बैठकर पुराने फिल्मी गीत सुनाना, उनके मायने समझाना, और उन दिनों की यादें साझा करना बेहद पसंद करते हैं। पुराने गीतों का जादू ही कुछ और होता है – हर शब्द में अर्थ, हर धुन में भाव, हर पंक्ति मन को छू लेती थी।

### जब आप गाते हैं, तो उम्र कम नहीं होती – मन जवान हो जाता है।

आजकल तो कई जगहों पर वरिष्ठ नागरिकों के ग्रुप बनने लगे हैं – जहां रोज गाना, हंसी-मजाक, कविता पाठ, भजन या लाइव म्यूजिक का माहौल बनता है। क्यों न आप भी इनमें शामिल हों? कौन जाने—आपके गीतों से प्रेरित होकर और लोग भी गाने लगें। और फिर, तारीफें सुनना किसे बुरा लगता है?

### वाद्ययंत्रों की धुनों में छुपी है अपार खुशी

हो सकता है कि आपके पास अब भी कोई पुराना वाद्ययंत्र रखा हो – बैंजो, सितार, हारमोनियम या माउथ ऑर्गन। कभी-कभी इसे बाहर निकालिए… और पुराने दिनों की धुनें छेड़िए। आज के युवा तो शायद बैंजो का नाम भी न जानते हों, पर एक जमाना था जब यह हर महफिल की शान होता था। मेरे कई मित्र माउथ ऑर्गन बहुत ही शानदार बजाते थे—उसकी मधुर आवाज सुनकर घंटों मन शांत रहता था। अब वह साधन कहीं कोने में पड़ा है, धूल जमा रहा है। क्यों न फिर एक बार उसे जीवन में वापस बुलाए? वाद्य बजाने का आनंद सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं होता – यह मन को सुकून देता है, दिमाग को सक्रिय रखता है और आत्मा को तरोताजा कर देता है।

### खुशी के लिए खुद को अधिकार दें

हम जिंदगी भर दूसरों के लिए जीते रहे – बच्चों के लिए, परिवार के लिए, समाज के लिए, काम के लिए। अब यह जीवन हमारा है। हमें खुद को यह अधिकार देना चाहिए कि – मैं खुश रहने के लिए समय निकाल सकता हूं। मैं वह कर सकता हूँ जो मेरे मन को शांति दे। मैं अपनी जिंदगी को अपने ढंग से जी सकता हूं। चाहे वह सुबह की चाय बालकनी में बैठकर पीना हो, चाहे किसी पुराने दोस्त से बात करना, चाहे संगीत सुनना, चाहे अपने शौक फिर से शुरू करना – हर वह चीज जो हमें मुस्कुराए, वह कीजिए।

याद रखिए – खुश रहने के लिए उम्र नहीं, मन चाहिए।

#### लेखक

![विजय मारू](https://neversayretired.in/wp-content/uploads/2025/01/maroo-vijay-mission-never-say-retired-150x150.jpg)***विजय मारू***

लेखक **नेवर से रिटायर्ड** मिशन के प्रणेता है। इस ध्येय के बाबत वो इस वेबसाइट का भी संचालन करते है और उनके फेसबुक ग्रुप **नेवर से रिटायर्ड फोरम** के आज कई हज़ार सदस्य बन चुके है।

